पुस्तक के बारे में
योग को केवल आसन या अभ्यास नहीं, बल्कि स्वयं की ओर लौटने की शास्त्रीय और प्रत्यक्ष यात्रा की तरह खोलने वाली पुस्तक। पतंजलि, गीता और उपनिषदों के आलोक में साधना को भीतर की पहचान तक ले जाती है।
पुस्तक के बारे में
योग को केवल आसन या अभ्यास नहीं, बल्कि स्वयं की ओर लौटने की शास्त्रीय और प्रत्यक्ष यात्रा की तरह खोलने वाली पुस्तक। पतंजलि, गीता और उपनिषदों के आलोक में साधना को भीतर की पहचान तक ले जाती है।