खोज की तैयारी
अज्ञान · जिज्ञासा · विवेक · वैराग्य
Opening your journey…

निर्वाण धाम प्रस्तुत करता है · निर्वाण सूत्र
17 चरणों की एक शांत, क्रमिक यात्रा—जो “मैं कौन हूँ?” को केवल एक विचार नहीं रहने देती। आदिसत्व की फ़िल्मों, गहन प्रश्नों और अपने अनुभव की जाँच के साथ चलें।
पहले से जुड़े हैं? यात्रा जारी रखेंअपनी भाषा में सुनें · अपनी गति से बढ़ें · अगली बार वहीं से शुरू करें
01 / यात्रा का स्वरूप
हर चरण एक मुख्य फ़िल्म से खुलता है। फिर दस प्रश्न उस समझ को अपने जीवन के पास ले आते हैं। सार, छोटे अभ्यास, जाँच और अपने शब्दों में उत्तर—ताकि सीखी हुई बात अनुभव की कसौटी पर उतरे।
हर चरण की मूल शिक्षा को पहले ध्यान से सुनें और देखें।
उसी विषय के दस प्रश्नों से अपनी धारणाओं को जाँचें।
सार, अवलोकन और जाँच के बाद जो साफ़ हुआ उसे व्यक्त करें।
Sign in करने पर आपकी प्रगति सुरक्षित रहती है।
02 / सत्रह चरण
चार पड़ावों में चलती यह यात्रा अज्ञान की पहचान से आत्मविचार और सहज जीवन तक पहुँचती है।
अज्ञान · जिज्ञासा · विवेक · वैराग्य
श्रवण · मनन · निदिध्यासन · नेति-नेति · साक्षीभाव
अनुभव · अनुभवकर्ता · आत्मविचार · आत्मज्ञान · ब्रह्मज्ञान
अज्ञेयता · शून्यता / मौन · सहज अवस्था
03 / अपनी भाषा में
भाषा चुनते ही पाठ्यक्रम के शब्द और उपलब्ध dubbed audio उसी भाषा के अनुसार मिलते हैं। अलग audio setting खोजने की ज़रूरत नहीं।
हिंदी · English · বাংলা · ગુજરાતી · ಕನ್ನಡ · മലയാളം · मराठी · ଓଡ଼ିଆ · ਪੰਜਾਬੀ · தமிழ் · తెలుగు
भाषा यात्रा के दौरान भी बदली जा सकती है।04 / फ़िल्मों के बाद
17 चरणों के बाद चार पड़ावों पर जाँच, अंतिम चिंतन और 12 सप्ताह का निदिध्यासन मार्ग है—जहाँ देखी हुई बात को दैनिक जीवन में परखने का अवसर मिलता है।
शुरू करने से पहले
नहीं। यात्रा अज्ञान और जिज्ञासा जैसे मूल प्रश्नों से आरंभ होती है और धीरे-धीरे आगे बढ़ती है।
नहीं। आप अपनी गति से चलते हैं। Sign in के बाद प्रगति सुरक्षित रहती है और लौटने पर उसी स्थान से आगे बढ़ सकते हैं।
शुरू में अपनी भाषा चुनें। पाठ और उपलब्ध dubbed audio उसके अनुरूप चलते हैं; आवश्यकता होने पर भाषा बाद में बदल सकते हैं।
यदि प्रश्न सच में आपका है
पहला चरण—अज्ञान। एक फ़िल्म, एक प्रश्न, और स्वयं को देखने की थोड़ी ईमानदारी।
अपनी यात्रा शुरू करें