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निर्वाण धाम लेख संग्रह

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हिंदी और English दोनों भाषाओं में वही क्रम, वही भाव, वही ज्ञान-धारा।

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माया का भ्रम: 5 गहरे सत्य जो आपके संसार देखने के नजरिए को बदल देंगे - Nirvan Dham
015 मिनट

माया का भ्रम: 5 गहरे सत्य जो आपके संसार देखने के नजरिए को बदल देंगे

प्रस्तावना

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गुरु की करुणा: निस्वार्थ प्रेम या एक ‘सुंदर’ बंधन? — ५ गहरे आध्यात्मिक रहस्य - Nirvan Dham
025 मिनट

गुरु की करुणा: निस्वार्थ प्रेम या एक ‘सुंदर’ बंधन? — ५ गहरे आध्यात्मिक रहस्य

प्रस्तावना: मुक्त चेतना का वह रहस्यमयी ‘लौटना’

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आत्मन, जीव या दोनों: हमारी असली पहचान क्या है? - Nirvan Dham
034 मिनट

आत्मन, जीव या दोनों: हमारी असली पहचान क्या है?

मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी विडंबना उसकी पहचान की खोज है। जब एक नवजात शिशु इस धरा पर आता है, तब वह पूर्णतः कोरा और निर्दोष होता है। उसके लिए जगत केवल आकृतियों और संवेदनाओं का एक ‘विस्मय बोध’ है। परंतु शीघ्र ही, समाज उस प...

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क्या यह जीवन भी एक सपना है? राजा जनक और अष्टावक्र के संवाद से निकले 5 क्रांतिकारी सूत्र - Nirvan Dham
045 मिनट

क्या यह जीवन भी एक सपना है? राजा जनक और अष्टावक्र के संवाद से निकले 5 क्रांतिकारी सूत्र

अक्सर सुबह जब हमारी नींद खुलती है, तो हम कहते हैं कि ‘इंजन शुरू होने’ में थोड़ा समय लगेगा। धीरे-धीरे चेतना लौटती है, स्मृतियाँ सक्रिय होती हैं और हम अपनी पहचान के साथ जुड़कर दैनिक कार्यों में जुट जाते हैं। लेकिन एक आध्यात...

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परमात्मा का ‘प्रेम रोग’: जब अद्वैत ही सत्य है, तो हम द्वैत की दवा क्यों ढूंढते हैं? - Nirvan Dham
055 मिनट

परमात्मा का ‘प्रेम रोग’: जब अद्वैत ही सत्य है, तो हम द्वैत की दवा क्यों ढूंढते हैं?

अक्सर आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले साधकों के सामने एक बड़ा विरोधाभास खड़ा होता है: यदि सत्य अद्वैत है, तो फिर यह जीव बार-बार द्वैत के प्रपंच और सांसारिक उलझनों की दवा क्यों ढूंढता है? हम बड़ी-बड़ी दार्शनिक बातें करते हैं, अ...

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अज्ञान का अंत: एक प्रयास या सहज बोध? (मांडूक्य उपनिषद की दृष्टि में आत्मा का वास्तविक स्वरूप) - Nirvan Dham
064 मिनट

अज्ञान का अंत: एक प्रयास या सहज बोध? (मांडूक्य उपनिषद की दृष्टि में आत्मा का वास्तविक स्वरूप)

‘निर्वाण धाम’ की आध्यात्मिक चेतना में प्रत्येक प्रश्न केवल एक जिज्ञासा नहीं, अपनिहित अज्ञान की गहरी परतों पर एक प्रहार है। अद्वैत वेदांत के मार्ग में मुख्य संशय यह उठता है कि क्या अज्ञान का नाश स्वतः घटित होता है या इसके...

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आपका स्वभाव मौन है, फिर संसार के शोर को सत्य मानने वाला कौन? | अद्वैत वेदांत और साक्षी भाव - Nirvan Dham
075 मिनट

आपका स्वभाव मौन है, फिर संसार के शोर को सत्य मानने वाला कौन? | अद्वैत वेदांत और साक्षी भाव

प्रस्तावना: अस्तित्व का अत्यंत सूक्ष्म अंतर्विरोध

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आत्मनिष्ठा और सत्य की खोज: वो 5 क्रांतिकारी विचार जो आपकी आध्यात्मिक दृष्टि बदल देंगे - Nirvan Dham
085 मिनट

आत्मनिष्ठा और सत्य की खोज: वो 5 क्रांतिकारी विचार जो आपकी आध्यात्मिक दृष्टि बदल देंगे

आज के सूचना प्रधान युग में हमारी बुद्धि सूचनाओं के संग्रह को ही ज्ञान मान बैठी है। हम ब्रह्मांड के रहस्यों से लेकर तकनीकी बारीकियों तक सब कुछ जान लेना चाहते हैं, परंतु उस ‘स्वयं’ से अपरिचित रह जाते हैं जो इन समस्त जानकार...

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ज्ञानी की मर्यादा: स्मृति का बोझ या बोध की सहजता? | जीव और ब्रह्म भाव का सत्य - Nirvan Dham
095 मिनट

ज्ञानी की मर्यादा: स्मृति का बोझ या बोध की सहजता? | जीव और ब्रह्म भाव का सत्य

सांसारिक जीवन में ‘मर्यादा’ का अर्थ अक्सर व्यवहारिक सीमाओं और उत्तरदायित्वों से लिया जाता है—जैसे पिता, पुत्र या पति के रूप में एक निश्चित आचरण। आध्यात्मिक पथ पर भी साधक के समक्ष एक सूक्ष्म प्रश्न खड़ा होता है: क्या ‘ज्ञा...

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मैं मृत्यु में मरता भी हूँ, अमर होकर जीता भी हूँ: सत्य और असत्य का महा-बोध - Nirvan Dham
105 मिनट

मैं मृत्यु में मरता भी हूँ, अमर होकर जीता भी हूँ: सत्य और असत्य का महा-बोध

आध्यात्मिक अन्वेषण की यात्रा में जब हम गहरे उतरते हैं, तो तर्क की सीमाएँ समाप्त होने लगती हैं और अनुभूतियाँ काव्यात्मक होने लगती हैं। “मैं मृत्यु में मरता भी हूँ और अमरता में जीता भी हूँ”—यह कथन कोई बौद्धिक विलास नहीं, ब...

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ब्रह्म और अद्वैत: क्या ये भी केवल विचार हैं? | विचारहीनता और सत्य का बोध - Nirvan Dham
115 मिनट

ब्रह्म और अद्वैत: क्या ये भी केवल विचार हैं? | विचारहीनता और सत्य का बोध

आध्यात्मिक यात्रा पर निकले एक साधक के अंतर्मन में अक्सर एक गहरी छटपटाहट होती है—सत्य को जानने की, उस परम शांति को पाने की जहाँ मन पूरी तरह शांत हो जाए। इस छटपटाहट के बीच अक्सर एक बड़ी भ्रांति घर कर लेती है: क्या विचारों क...

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सहजावस्था दुर्लभ कैसे है? | सहज का वास्तविक मर्म: एक आध्यात्मिक अन्वेषण - Nirvan Dham
125 मिनट

सहजावस्था दुर्लभ कैसे है? | सहज का वास्तविक मर्म: एक आध्यात्मिक अन्वेषण

सहजावस्था का अर्थ है वह स्थिति जो हमारे अस्तित्व का मूल स्वभाव है। किंतु आध्यात्मिक मार्ग पर एक गहरा विरोधाभास सदैव मुमुक्षुओं को चकित करता रहा है—जो ‘सहज’ (Natural) है, वह ‘दुर्लभ’ (Rare) कैसे हो सकता है? यह लेख इसी गहन...

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आत्म-साक्षात्कार: क्या आप उसे देख सकते हैं जो स्वयं देखने वाला है? - Nirvan Dham
135 मिनट

आत्म-साक्षात्कार: क्या आप उसे देख सकते हैं जो स्वयं देखने वाला है?

आध्यात्मिक यात्रा का सबसे गहरा विरोधाभास यह है कि हम उसे खोजने की चेष्टा कर रहे हैं जो स्वयं हमारी खोज का आधार है। यह वैसा ही है जैसे कोई व्यक्ति अपनी आँखों से स्वयं अपनी ही आँखों को देखने का हठ करे। हम अक्सर ‘स्वयं को ज...

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अज्ञान का रहस्य: यदि सब कुछ ब्रह्म है, तो यह अज्ञान का ‘अंधेरा’ कहाँ से आया? - Nirvan Dham
144 मिनट

अज्ञान का रहस्य: यदि सब कुछ ब्रह्म है, तो यह अज्ञान का ‘अंधेरा’ कहाँ से आया?

अद्वैत वेदांत की आधारशिला यह है कि केवल ब्रह्म ही सत्य है—वह पूर्ण, शुद्ध और सर्वज्ञ है। परंतु यहीं एक सूक्ष्म पहेली खड़ी होती है: यदि प्रकाश ही एकमात्र वास्तविकता है, तो अज्ञान की यह छाया कहाँ से आई? यह प्रश्न केवल एक बौ...

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अज्ञेता का विस्मय: अवधारणाओं का विसर्जन और सहज बोध - Nirvan Dham
155 मिनट

अज्ञेता का विस्मय: अवधारणाओं का विसर्जन और सहज बोध

विस्मय की प्रचंडता

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सत्य की खोज: आत्म-बोध और संसार में निर्लिप्त जीने की कला - Nirvan Dham
165 मिनट

सत्य की खोज: आत्म-बोध और संसार में निर्लिप्त जीने की कला

आध्यात्मिक साधना के पथ पर बढ़ते हुए साधक के अंतःकरण में ‘मैं कौन हूँ?’ और ‘अज्ञान का मूल क्या है?’ जैसी जिज्ञासाएँ उठना नितांत स्वाभाविक हैं। सत्संग वह पावन क्षेत्र है जहाँ इन अनुत्तरित प्रश्नों पर व्यवस्थित और सूक्ष्म च...

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सत्य और असत्य के बीच का रहस्य: माया के विरोधाभास को समझने के 4 मुख्य सूत्र - Nirvan Dham
175 मिनट

सत्य और असत्य के बीच का रहस्य: माया के विरोधाभास को समझने के 4 मुख्य सूत्र

हम जिस संसार में सांस लेते हैं, जिसे अपनी इंद्रियों से स्पर्श करते हैं और अनुभव करते हैं, वह हमें ठोस और ‘सत्य’ प्रतीत होता है। परंतु जब हम उपनिषदों की गहराई में उतरते हैं या ऋषियों की वाणी सुनते हैं, तो वे इस दृश्यमान ज...

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आत्मबोध के बाद ‘मैं’ कहाँ जाता है? अहम् की सुई का रहस्य - Nirvan Dham
185 मिनट

आत्मबोध के बाद ‘मैं’ कहाँ जाता है? अहम् की सुई का रहस्य

एक साधक के रूप में, आपको उस विरोधाभास का सामना करना ही होगा जिसे अक्सर ‘ज्ञानी का अहंकार’ कहा जाता है। कई जिज्ञासु यह अनुभव करते हैं कि सत्य की सैद्धांतिक समझ (परोक्ष ज्ञान) होने के बाद भी आसक्तियाँ और ‘मैं’ का भाव पूरी...

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साक्षी भाव और प्रेम का रहस्य: क्या हम केवल अभिनय कर रहे हैं? - Nirvan Dham
195 मिनट

साक्षी भाव और प्रेम का रहस्य: क्या हम केवल अभिनय कर रहे हैं?

अध्यात्म की गहराइयों में उतरते ही हमारे सामने दो बड़े शब्द आते हैं: साक्षी भाव (Witnessing) और प्रेम (Love)। ‘मैं कौन हूँ?’ की खोज में निकले हर साधक के लिए ये दो शब्द ध्रुव तारे की तरह हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है...

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“मैं हूँ” का बोध या सिर्फ एक नया बोझ? आध्यात्मिक यात्रा के 5 चौंकाने वाले सत्य - Nirvan Dham
205 मिनट

“मैं हूँ” का बोध या सिर्फ एक नया बोझ? आध्यात्मिक यात्रा के 5 चौंकाने वाले सत्य

अक्सर आध्यात्मिक पथ पर चलते हुए हम एक विचित्र विरोधाभास का शिकार हो जाते हैं। हम अज्ञान के अंधेरे से तो बाहर निकल आते हैं, लेकिन अनजाने में ही “मैं मुक्त हूँ” या “मैं ज्ञानी हूँ” के एक नए और सूक्ष्म बोझ के नीचे दब जाते ह...

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ब्रह्म और अद्वैत: क्या ये भी केवल विचार हैं? | विचारहीनता और सत्य का बोध - Nirvan Dham
215 मिनट

ब्रह्म और अद्वैत: क्या ये भी केवल विचार हैं? | विचारहीनता और सत्य का बोध

आध्यात्मिक यात्रा पर निकले एक साधक के अंतर्मन में अक्सर एक गहरी छटपटाहट होती है—सत्य को जानने की, उस परम शांति को पाने की जहाँ मन पूरी तरह शांत हो जाए। इस छटपटाहट के बीच अक्सर एक बड़ी भ्रांति घर कर लेती है: क्या विचारों क...

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सहजावस्था दुर्लभ कैसे है? | सहज का वास्तविक मर्म: एक आध्यात्मिक अन्वेषण - Nirvan Dham
225 मिनट

सहजावस्था दुर्लभ कैसे है? | सहज का वास्तविक मर्म: एक आध्यात्मिक अन्वेषण

सहजावस्था का अर्थ है वह स्थिति जो हमारे अस्तित्व का मूल स्वभाव है। किंतु आध्यात्मिक मार्ग पर एक गहरा विरोधाभास सदैव मुमुक्षुओं को चकित करता रहा है—जो ‘सहज’ (Natural) है, वह ‘दुर्लभ’ (Rare) कैसे हो सकता है? यह लेख इसी गहन...

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आत्म-साक्षात्कार: क्या आप उसे देख सकते हैं जो स्वयं देखने वाला है? - Nirvan Dham
235 मिनट

आत्म-साक्षात्कार: क्या आप उसे देख सकते हैं जो स्वयं देखने वाला है?

आध्यात्मिक यात्रा का सबसे गहरा विरोधाभास यह है कि हम उसे खोजने की चेष्टा कर रहे हैं जो स्वयं हमारी खोज का आधार है। यह वैसा ही है जैसे कोई व्यक्ति अपनी आँखों से स्वयं अपनी ही आँखों को देखने का हठ करे। हम अक्सर ‘स्वयं को ज...

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“मैं घर के बाहर देख नहीं पाता, तो सर्वव्याप्त कैसे हुआ?” : अज्ञान के सार को समझने की एक गहरी यात्रा - Nirvan Dham
246 मिनट

“मैं घर के बाहर देख नहीं पाता, तो सर्वव्याप्त कैसे हुआ?” : अज्ञान के सार को समझने की एक गहरी यात्रा

अध्यात्म की डगर पर चलते हुए हम अक्सर यह सुनते हैं कि हमारी वास्तविक प्रकृति अनंत, असीम और सर्वव्यापी है। उपनिषदों का उद्घोष है—”तत्त्वमसि”, यानी तुम वही (ब्रह्म) हो। लेकिन एक जिज्ञासु मन के भीतर तुरंत एक व्यावहारिक और तर...

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क्या आत्मबोध के बिना आनंद संभव है? अज्ञान के नाश से परम शांति तक के 5 गहरे सत्य - Nirvan Dham
255 मिनट

क्या आत्मबोध के बिना आनंद संभव है? अज्ञान के नाश से परम शांति तक के 5 गहरे सत्य

आज के समय में जब हम शांति की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा अर्थ किसी बाहरी परिस्थिति के अनुकूल होने से होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या स्वयं को जाने बिना—अपने वास्तविक स्वरूप को पहचाने बिना—स्थायी आनंद संभव ह...

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आत्म-स्मृति: चित्त के प्रतिरूपों से ब्रह्म-विलयन का एक अपरोक्ष विवेचन - Nirvan Dham
265 मिनट

आत्म-स्मृति: चित्त के प्रतिरूपों से ब्रह्म-विलयन का एक अपरोक्ष विवेचन

अद्वैत वेदांत और ज्ञान मार्ग की पूरी साधना का सार केवल एक शब्द में सिमटा है—स्मृति। संसार का अर्थ है ‘विस्मृति’ (भूल जाना) और मोक्ष का अर्थ है ‘स्मृति’ (याद आ जाना)। हम ब्रह्म ‘बनते’ नहीं हैं, हम ब्रह्म ‘हैं’, बस हम इसे...

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ज्ञानमार्ग: ज्ञान का सीधा मार्ग – मार्गहीन मार्ग - Nirvan Dham
274 मिनट

ज्ञानमार्ग: ज्ञान का सीधा मार्ग – मार्गहीन मार्ग

ज्ञानमार्ग इच्छापूर्ति का मार्ग नहीं है।कभी-कभी जीवन में उसका प्रभाव सकारात्मक दिख सकता है, कुछ शुद्धिकरण भी होता है, पर यह उसका उद्देश्य नहीं।ज्ञानमार्ग का लक्ष्य है — अज्ञान का नाश, और उस नाश के परिणामस्वरूप उत्पन्न हो...

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प्रश्न ५: अस्तित्व का तत्त्व क्या है? - Nirvan Dham
281 मिनट

प्रश्न ५: अस्तित्व का तत्त्व क्या है?

अस्तित्व का तत्त्व अनुभवकर्ता है।

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प्रश्न ४: अज्ञेयता का क्या उपयोग है? - Nirvan Dham
291 मिनट

प्रश्न ४: अज्ञेयता का क्या उपयोग है?

अज्ञेयता वह है जिसे जाना नहीं जा सकता।जो कुछ भी जाना जाए — वह अनुभव है, और इसलिए परिवर्तनशील।परिवर्तनशील ज्ञेय है;अपरिवर्तनशील अज्ञेय।

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प्रश्न ३: सत्य क्यों नहीं जाना जा सकता? - Nirvan Dham
302 मिनट

प्रश्न ३: सत्य क्यों नहीं जाना जा सकता?

सत्य को जानने की इच्छा जन्मजात है, पर ज्ञानमार्ग में सबसे पहले यह स्पष्ट करना आवश्यक होता है कि—क्या सत्य कभी “जाना” जा सकता है?आपका मनन उसी मूल बिंदु को पकड़ता है:जो भी जाना जाता है, वह अनुभव होता है;और अनुभव का स्वभाव...

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प्रश्न-२: प्रमाण क्या है और क्यों आवश्यक है? - Nirvan Dham
312 मिनट

प्रश्न-२: प्रमाण क्या है और क्यों आवश्यक है?

ज्ञानमार्ग में “प्रमाण” का अर्थ है—जो किसी बात की सत्यता को मेरे स्वयं के अनुभव और तर्क से स्थापित करे।बिना प्रमाण के जो भी स्वीकार किया जाता है, वह केवल मान्यता या अन्य का ग्यान है,जो मेरे लिए अज्ञान ही रहेगा।

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प्रश्न-१: ज्ञानमार्ग दुःख से मुक्ति कैसे दिलाता है? - Nirvan Dham
322 मिनट

प्रश्न-१: ज्ञानमार्ग दुःख से मुक्ति कैसे दिलाता है?

ज्ञानमार्ग की दृष्टि से दुःख कोई वस्तु नहीं है;यह केवल अनुभव है — और हर अनुभव की तरह अनित्य और परिवर्तनशील।

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मनन क्या है? ज्ञानमार्ग में सत्यापन की गूढ़ कला - Nirvan Dham
333 मिनट

मनन क्या है? ज्ञानमार्ग में सत्यापन की गूढ़ कला

(गुरुदेव तरुण प्रधान जी की शिक्षाओं पर आधारित — निर्वाणधाम द्वारा संकलित)

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ब्रह्मज्ञान क्या है? अद्वैत, अनुभवकर्ता और अस्तित्व का अंतिम सत्य - Nirvan Dham
345 मिनट

ब्रह्मज्ञान क्या है? अद्वैत, अनुभवकर्ता और अस्तित्व का अंतिम सत्य

(गुरुदेव तरुण प्रधान जी को समर्पित )

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चेतना और चैतन्य: गुरु आदिसत्व जी का आज का दैनिक सत्संग - Nirvan Dham
354 मिनट

चेतना और चैतन्य: गुरु आदिसत्व जी का आज का दैनिक सत्संग

गुरु आदिसत्व जी की वाणी से

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साक्षी या साक्षीभाव? ज्ञानमार्ग का गहन रहस्य - Nirvan Dham
363 मिनट

साक्षी या साक्षीभाव? ज्ञानमार्ग का गहन रहस्य

(ज्ञानमार्ग की दृष्टि से आज की चर्चा का सार)

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कुंडलिनी ऊर्जा — मिथ्याएँ, वास्तविकता और साधक की आंतरिक यात्रा - Nirvan Dham
374 मिनट

कुंडलिनी ऊर्जा — मिथ्याएँ, वास्तविकता और साधक की आंतरिक यात्रा

कुंडलिनी शब्द सुनते ही मन में रहस्यमयी शक्ति, अचानक उठने वाली ऊर्जा, चमत्कारिक अनुभव और कई तरह की कहानियाँ उभर आती हैं।

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ज्ञानमार्ग: अद्वैत वेदांत की सरल और स्पष्ट व्याख्या - Nirvan Dham
384 मिनट

ज्ञानमार्ग: अद्वैत वेदांत की सरल और स्पष्ट व्याख्या

(अद्वैत वेदांत की सामूहिक दृष्टि से एक स्पष्ट व्याख्या)

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मैं हूँ: ब्रह्म या भ्रम? | अद्वैत वेदांत की सरल व्याख्या - Nirvan Dham
392 मिनट

मैं हूँ: ब्रह्म या भ्रम? | अद्वैत वेदांत की सरल व्याख्या

एक सीधा उत्तर, अद्वैत वेदांत की दृष्टि से

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