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निर्वाण सूत्रनिर्वाण धाम

निर्वाण धाम की ओर से

निर्वाण सूत्र

जिज्ञासा से प्रत्यक्ष दर्शन तक की एक शांत यात्रा

यह कोई साधारण कोर्स नहीं। सत्रह चरणों में यह यात्रा अपने बारे में मानी हुई बातों को धीरे-धीरे जाँचती है — अज्ञान से जिज्ञासा तक, साक्षी से आत्मविचार तक, और मौन से सहज जीवन तक।

पूरा पाठ्यक्रम — पाठ, प्रश्न और फ़िल्मों की आवाज़ — आपकी भाषा में होगा। भाषा बाद में भी बदली जा सकती है; प्रगति नहीं खोएगी।

17चरण
170गहन प्रश्न
4पड़ाव
12सप्ताह का निदिध्यासन
11भाषाएँ

जिसे बाहर खोज रहे हैं, क्या वह पहले से पास है?

चरण 1 · अज्ञान

शब्दावली

17 चरण · PDF

शब्दावली →

यात्रा के दो भाग

ज्ञान-यात्रा

श्रवण + मनन

सत्रह चरणों में शिक्षा-फ़िल्में, लिखित सार, स्वयं देखने के प्रयोग और समझ की जाँच — अपनी गति से, बिना किसी जल्दबाज़ी के।

निदिध्यासन संग

तीन माह का मार्गदर्शित समाकलन

ज्ञान-यात्रा पूरी होने पर बारह सप्ताह का मार्गदर्शित निदिध्यासन: हर सप्ताह एक संकेत, निजी चिंतन और मार्गदर्शक के साथ सत्र।

हर चरण के भीतर

हर चरण में एक मुख्य शिक्षा-फ़िल्म, लिखित सार, एक छोटा प्रयोग, समझ की जाँच और दस गहरे प्रश्न हैं।

  1. मुख्य शिक्षा-फ़िल्मविषय को सीधे और सरल रूप में खोलती एक मुख्य शिक्षा-फ़िल्म।
  2. सारफ़िल्म का लिखित सार और मुख्य भेद, जिन्हें बार-बार पढ़ा जा सके।
  3. स्वयं देखेंएक छोटा प्रयोग, जिसमें बात को अपने ही अनुभव में जाँचा जाता है।
  4. समझ की जाँचतीन प्रश्न, जिनके उत्तर आप अपने शब्दों में लिखते हैं; यहाँ सही-गलत नहीं, केवल ईमानदार देखना है।
  5. और गहराई में जाएँदस गहरे प्रश्न, जो जिज्ञासा को और भीतर ले जाते हैं।

सत्रह चरणों की यात्रा

चार खंड, सत्रह चरण। हर चरण एक केंद्रीय जिज्ञासा के साथ।

खंड 1

खोज की तैयारी

अज्ञान को पहचानना, जिज्ञासा जगाना, विवेक और वैराग्य से मन को तैयार करना

  1. 01
    अज्ञानअपने स्वरूप को न जाननाजिसे बाहर खोज रहे हैं, क्या वह पहले से पास है?
  2. 02
    जिज्ञासासत्य को जानने की सच्ची चाहक्या आपके भीतर भी कोई प्रश्न सो रहा है?
  3. 03
    विवेकबदलने वाले और जानने वाले में भेदचमक और सच — कौन-सी कसौटी अलग करे?
  4. 04
    वैराग्यचिपकाव से भीतर की आज़ादीपूरे मन से करना — और फल से मुक्त रहना?
खंड 2

समझ और आत्मपरीक्षण

सुनना, जाँचना, ठहरना — और दृश्य से हटकर साक्षी की ओर

  1. 05
    श्रवणशिक्षा को अपनी ओर देखने देनासुनना और सचमुच सुनना — क्या अंतर?
  2. 06
    मननसुनी हुई बात अपनी समझ बनेसुनी हुई बात अपनी समझ कैसे बनती है?
  3. 07
    निदिध्यासनसमझे हुए सत्य में ठहरनासमझा हुआ सत्य स्वाभाविक कैसे बने?
  4. 08
    नेति-नेतियह नहीं, यह नहींअपने को जानना — जोड़ना, या हटाना?
  5. 09
    साक्षीभाववह चेतना जिसमें सब प्रकट होता हैक्या आपके भीतर भी कोई चुपचाप देख रहा है?
खंड 3

अनुभव से अनुभवकर्ता की ओर

अनुभव, अनुभव करने वाला, ‘मैं कौन हूँ?’ — और सबकी एक सच्चाई

  1. 10
    अनुभवजो प्रकट होता है, और जाता हैअनुभव आते-जाते हैं — जानने वाला?
  2. 11
    अनुभवकर्ता‘मुझे हो रहा है’ वाला भावअनुभव किसे होता है?
  3. 12
    आत्मविचार‘मैं’ के स्रोत की ओर लौटनामैं कौन हूँ?
  4. 13
    आत्मज्ञानहमेशा से मौजूद की पहचानजो कभी खोया नहीं — उसे पाना क्या?
  5. 14
    ब्रह्मज्ञानसब नाम-रूपों की एक सच्चाईसब कुछ — एक ही से बना?
खंड 4

मौन से सहज जीवन

जानने की सीमा, मौन, और समझ में टिका साधारण जीवन

  1. 15
    अज्ञेयताजानने वाला वस्तु नहींदेखने वाला — देखा नहीं जाता, फिर भी अनजाना?
  2. 16
    शून्यता / मौनवस्तुओं से ख़ाली, जागरूकता से भरामौन — आवाज़ का न होना, या जिसमें आवाज़ है?
  3. 17
    स्थितप्रज्ञ जीवन / सहज अवस्थासमझ में टिककर, सहज जीनाज्ञान के बाद — जीवन कैसा?
12 · सप्ताह का निदिध्यासन

निदिध्यासन संग

तीन माह का मार्गदर्शित समाकलन

आरंभ कैसे करें

  1. 1अपना निर्वाण धाम खाता बनाएँ, या लॉगिन करें।
  2. 2अपना नाम बताएँ। भाषा आप चुन चुके हैं।
  3. 3पहले चरण की शिक्षा-फ़िल्म से यात्रा आरंभ करें।

यह पाठ्यक्रम किसी अवस्था की प्राप्ति का वादा नहीं करता। यह अपने आप को ध्यान से देखने का एक शांत, अनुशासित अवसर है।

पहला चरण आपकी प्रतीक्षा में है

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